Thursday, 7 December 2017

राम जन्मभूमि vs बाबरी मस्जिद : ऑनलाइन वोटिंग में आखिर जीत कौन रहा है !


राम जन्मभूमि vs बाबरी मस्जिद : ऑनलाइन वोटिंग में आखिर जीत कौन रहा है ! 

जहां एक ओर 'राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद' मामला सुप्रीम कोर्ट में है, वहीं दूसरी ओर कुछ शरारती तत्व गलत तरीके से इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं.

यूपी के अयोध्या का 'राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद' मामला कई सालों से विवाद का विषय बना हुआ है. इसका समाधान करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई किया जाना तय हुआ है. लेकिन जहां एक ओर यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है, वहीं दूसरी ओर कुछ शरारती तत्व गलत तरीके से इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं. इसके लिए शरारती तत्वों ने कई फर्जी वेबसाइट भी बना दी हैं. इन वेबसाइट पर सीधे लोगों की राय मांगी जा रही है कि आखिर अयोध्या की विवादित भूमि पर राम मंदिर बनना चाहिए या फिर मस्जिद बनाई जानी चाहिए. अपनी राय के हिसाब से लोगों से वोट की अपील की जा रही है.
क्या कहा जा रहा है वेबसाइट पर?
ये फर्जी वेबसाइट https://jaagoindian.org/ayodhya/ है, जिस पर राम मंदिर और बाबरी मस्जिद की तस्वीरों को एक साथ जोड़कर दिखाया गया है. तस्वीर पर Ram Mandir V/S Babri Masjid लिखा है और पूछा गया है कि अयोध्या में क्या बनना चाहिए? तस्वीर के नीचे वोट करने के लिए एक टैब भी दिया गया है. वोट के लिए तीन विकल्प दिए हैं- राम मंदिर, बाबरी मस्जिद और दोनों. इतना ही नहीं, वोट करने के बाद इस वेबसाइट के लिंक को फेसबुक और वाट्सऐप पर शेयर करने की अपील की गई है. वेबसाइट में नीचे की तरफ इस मैसेज को शेयर करने के लिए लिंक भी दिए गए हैं
अप्रैल में बनी थी सरकारी वेबसाइट जैसी फर्जी साइट
ये फर्जी वेबसाइट www.ayodhya-issue.gov-up.in था. बहुत से लोग इन फर्जी वेबसाइट के झांसे में भी आ रहे थे. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि एक वेबसाइट का डोमेन नेम यूपी की सरकारी वेबसाइट (www.up.gov.in) जैसा था. हालांकि, अब सरकारी वेबसाइट जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट www.ayodhya-issue.gov-up.in को बंद कर दिया गया है. इस वेबसाइट पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर भी लगी थी.

किसने बनाई थी ये वेबसाइट
जब पड़ताल की गई तो पता चला कि सरकार बेवसाइट के जैसी दिखने वाली यह फर्जी वेबसाइट तरुण चौधरी नाम के एक शख्स ने बनाई थी, जो दक्षिणी दिल्ली का रहने वाला निवासी पाया गया. वहीं वेबसाइट की जानकारियों में जो मोबाइल नंबर दिया गया था वह कर्नाटक के अख्तर अली का था. अख्तर अली बेंगलुरु में एक आईटी फर्म चलाते हैं. अख्तर अली से जब इस मामले पर बात करने पर उन्होंने बताया था कि कोई उनके नंबर का गलत इस्तेमाल कर रहा है और इस वेबसाइट से उनका कोई लेना-देना नहीं है. इसके बाद उन्होंने इस मामले को लेकर पुलिस में शिकायत भी की थी।

ना करें ऐसे लिंक को शेयर
अगर आपसे भी ऐसी किसी वेबसाइट के लिंक को शेयर करने की अपील की जाती है, तो ऐसा ना करें और तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें. दरअसल, अयोध्या की विवादित भूमि का मुद्दा कई साल पुराना है और बेहद संवेदनशील भी है. इस तरह के किसी मैसेज को शेयर करने से धार्मिक भावनाएं भड़क सकती हैं, जो भयानक हिंसा का रूप ले सकती हैं. इतना ही नहीं, अगर आपके किसी मैसेज से ऐसी कोई घटना होती है, तो उसके लिए आप पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.

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